अमर जवान ज्योति का नेशनल वॉर मेमोरियल में हुआ विलय, इस मुद्दे पर छिड़ी राजनीति:

दिल्ली में आयोजित समारोह में इंडिया गेट पर पिछले 50 सालों स्व जल रही अमर जवान ज्योति का विलय शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे नेशनल वॉर मेमोरियल में कर दिया गया। एयर मार्शल बालभद्र राधाकृष्ण की अध्यक्षता में यह समारोह हुआ जिसमें पूरे सैन्य सम्मान के साथ मशाल के जरिये अमर जवान ज्योति का विलय नेशनल वॉर मेमोरियल में किया गया। अमर जवान ज्योति की स्थापना 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में भारत-पाक युद्ध के शहीदों की स्मृति में की थी।

इंडिया गेट पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति:
इस कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बताया कि अमर जवान ज्योति के पास 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की होलोग्राम मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। यह मूर्ति तब तक रहेगी जब तक असली मूर्ति तैयार नहीं हो जाती। प्रधानमंत्री मंत्री का ये फैसला उस वक़्त आया जब अमर जवाब ज्योति के स्थानांतरण से राजनीतिक मुद्दे तेज थी।

नेशनल वॉर मेमोरियल:
नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण केंद्र सरकार ने 2019 में किया था। इसे 1947 में देश की आज़ादी के बाद से अबतक शहादत दे चुके 26,466 भारतीय जवानों के सम्मान में निर्मित किया गया था। 25 फरबरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्मारक का उदघाटन किया यह। इंडिया गेट और नेशनल वॉर मेमोरियल के बीच की दूरी लगभग 500 मीटर की है।

फैसले पर राजनीति:
सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रही है इसका विरोध कर रही है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा कि, “बहुत दुख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसे आज बुझा दिया जाएगा. कुछ लोग देशप्रेम व बलिदान नहीं समझ सकते, कोई बात नहीं. हम अपने सैनिकों के लिए अमर जवान ज्योति एक बार फिर जलाएंगे!” वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इसका विरोध किया। उन्होंने ट्वीट करते में लिखा कि, ‘मोदी जी आप ना किसान के हैं न जवान के। 1971 के भारत-पाक युद्ध मे हमारे जवानों ने अपनी शहादत दी। उनकी याद में 50 वर्षों से ये अमर जवान ज्योति जल रही है। आप उस शहादत का अपमान कर रहे हैं। ये देश आपको कभी माफ नहीं करेगा’

*इसको लेकर काफी गलतफहमीयां फैलाई जा रही है:*
सरकारी सूत्रों ने बताया कि आज के इवेंट को लेकर काफ़ी गलतफहमीयां हैं। अमर जवान ज्योति को बुझाया नहीं जा रहा है। इसका नेशनल वॉर मेमोरियल पर प्रज्ज्वलित ज्योति के साथ विलय किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि यह काफी अजीब बात थी कि अमर जवान ज्योति पर जलने वाली ज्योत 1971 और अन्य युद्धों में शहीद होने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देती थी लेकिन उनमें से किसी का नाम यहां नहीं लिखा था।
इंडिया गेट पर जो नाम लिखे हैं वे उन सैनिकों के हैं जो वर्ल्ड वॉर-1 और एंग्लो-अफ़ग़ान वॉर में शहीद हुए। यह हमारे गुलामी वाले समय की याद दिलाते हैं। 1971 के युद्ध समेत बांकी सभी युद्धों में शहीद होनेवाले सैनिकों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल में दर्ज है। इसलिए वहां ज्योति जलाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह विडंबना है कि जिन लोगों ने 70 साल में नेशनल वॉर मेमोरियल नहीं बनाया वे अब हमारे शहीद सैनिकों को सही श्रद्धांजलि मिलने पर विवाद खड़ा कर रहे हैं।

न्यूज़:- सचिन सिंह प्रभात
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