क्यों है भारतीय महिलायें घरेलू हिंसा का शिकार , जानिए प्रमुख कारण ।

N.C.R.B के 2020 के डाटा के अनुसार , एक साल में 22,000 से ज्यादा हाउसवाइफस् ने अपनी जान ले ली । इस हिसाब से प्रत्येक दिन औसतन 61 हाउसवाइफस् ने सूइसाइड किया या फिर कह ले प्रत्येक 25 मिनट में 1 सूइसाइड ।

हम सभी भारतीय समाज से भली – भांति परिचित है और यह हम जानते है की सूइसाइड का यह आकड़ा बहुत कम है ,क्योंकि बहुत से केस तो रिपोर्ट ही नहीं किए जाते । दीपा नारायण जी , जो की एक सामाजिक वैज्ञानिक और भारतीय वुमन पर लिखे गए किताब की लेखक का कहना है ‘ किसी भी परिवार के लिए बहुत ही शर्मनाक बात होती है अगर उस परिवार की बहु अपनी जान ले ले , इसलिए परिवार अक्सर दूसरा कारण देकर मामले को टाल देते है ।

2018 की Lancent की रिपोर्ट के अनुसार भारत में औरतों की आत्महत्या में शादी – शुदा महिलाओं का प्रतिशत ज्यादा है ।

आइए जाने इसके प्रमुख कारण ।

1 ) घरेलू हिंसा – बता दे की दुनिया में हर तीसरी महिला को उसके पति द्वारा पीटा जाता है । घरेलू हिंसा के कारण महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है । 2012 के रेसर्च पेपर के अनुसार , वैसी महिलायें जो घरेलू हिंसा को सहती है उनमे सूइसाइड करने की संभावना तीन गुण बढ़ जाती है ।

कल्पना मिश्रा , quint को दिए इंटरव्यू में बताया ‘ मैंने अब्यूसिव पति की वजह से खुद को 2 बार जान से मारने की कोशिश की । पहली बार मैंने पेस्टिसाइड पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की क्योंकि मेरे पति ने पिछले दिन मुझे बहुत बुरी तरह से पीटा था ,मेरे सास ससुर मुझे अस्पताल ले गए लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने मुझसे अपने  पति से माफी मांगने को कहा । ’

बता दे की कोविड 19 की वजह से तो भारतीय घरों में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की स्थति और खराब हो गई । चैतली सिन्हा , जो की एक मनोवैज्ञानिक है उनका कहना है की ‘ हाउसवाइफस् के लिए उनका घर सुरक्षित स्पेस देता है जब उनके पति काम के लिए बाहर जाते है’ , लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह भी खत्म हो गया । इससे हाउसवाइफस् को पूरे दिन अपने अब्यूसिव पति के साथ ही रहना पड़ता है।  ”यानि हम कह सकते कि घरेलू हिंसा भारतीय महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी है ।

2 ) दहेज – महिलाओं की खराब स्थिति और सूइसाइड का दूसरा प्रमुख कारण दहेज प्रथा ही है । जून 2021 की ही बात करे तो केवल दो दिनों के अंदर 3 महिलाओं ने आत्महत्या कर लिया । साथ मे एक सूइसाइड नोट भी मिलता है जिसमे लिखा होता है ‘ दहेज की वजह से उन्हे यह बड़ा कदम उठाना पड़ा ’।

डोना फर्नांडीस जो ( नारी अधिकार के लिए काम करने वाले N.G.O ) के साथ जुड़ी है उनका कहना है कि महिलाओं द्वारा किए गए 50% सूइसाइड दहेज की वजह से होते है लेकिन दहेज से होने वाले बहुत से सूइसाइड केस रिपोर्ट ही नहीं होते क्योंकि लड़की के माता – पिता दहेज मे भागीदार होते है दहेज देना भी गुनाह है । 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार सन् 1920 के दौरान भारत में दहेज लेने का स्तर 40% था लेकिन सन् 2000 के बाद से यह आकड़ा 90% तक जा पहुँचा है। बात करे तो पहले दहेज स्त्री धन का रूप था। दहेज लड़की को दी जाती थी ताकि वह अपने नए घर में खुद का देखभाल सही से कर सके लेकिन समय के साथ दहेज का अर्थ बदल गया । अब दहेज लड़का और उसके परिवार के तरफ से मांगा जाता है , इस कारण कई बार लड़का और उसका परिवार दहेज मे दिए गए रकम से असन्तुष्ट होते है यही से दहेज को लेकर प्रताड़ना शुरू हो जाती है ।

बता दे की दहेज प्रथा को रोकने के लिए वर्तमान के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बहुत कार्य किया उनमे से प्रमुख सत्या रानी चढा है वही इतिहास की बात करे तो सबसे प्रमुख नाम राजा राम मोहन राय का आता है जिन्होंने न बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ बोला बल्कि और भी सामाजिक कुरीतियाँ जैसे : सती प्रथा , पर्दा प्रथा ,जाति प्रथा और बाल विवाह आदि के खिलाफ भी आवाज उठाई ।

3 ) आर्थिक निर्भरता – तीसरा सबसे प्रमुख कारण आर्थिक निर्भरता । अधिकतर भारतीय महिलायें पूरी तरह से अपने पति पर आर्थिक रूप से निर्भर होती है । इसके कारण अवसाद और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप हमे महिलाओं द्वारा सूइसाइड की खबरे देखने को मिलती है । अगर भारत की तुलना पड़ोसी देशों से करें तो हम पाते है की भारत मे महिलाओं का कामों मे भागीदारी बहुत कम है । भारतीय महिलायें बाजार में काम मे हिस्सा नहीं लेती ।

भारत सरकार द्वारा कराए गए N.S.S.O के 68वें राउन्ड के सर्वे के अनुसार 64% प्रतिशत घरेलू महिलाओं का कहना था कि उनके पास घरेलू काम को छोड़कर और काम करने क कोई विकल्प ही नहीं है ।

 ऐसे में हमे महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर प्रदान करने की जरूरत है । लोगों की मानसिकता के साथ – साथ महिलाओं की मानसिकता मे भी बदलाव की जरूरत है । सरकार महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दे रही है इसके लिए हमे जरूरी है की शिक्षा पर ध्यान दिया जाए ।