‘चित्र भारती राष्ट्रीय लघु फिल्म उत्सव में करीब 750 वीडियो हमें प्राप्त हुए हैं।’ – अमिताभ सोनी

भोपाल। भारतीय चित्र साधना के प्रतिष्ठित ‘चित्र भारती राष्ट्रीय लघु फिल्म उत्सव-2022′  का आयोजन 18 से 20 फरवरी, 2022 तक भोपाल में होने वाला है। इस लघु फिल्म उत्सव का आयोजन दो वर्षों के अंतराल पर होता है। वर्ष 2016 में इसका पहला आयोजन इंदौर, 2018 में दिल्ली, 2020 में अहमदाबाद और अब 2022 में भोपाल के बिशनखेड़ी स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में होगा। इस लघु फिल्मोत्सव के सचिव श्री अमिताभ सोनी जी से हिन्दुस्थान समाचार की टीम ने खास बातचीत की है।

आपने इस वर्ष के चित्र भारती राष्ट्रीय लघु फिल्मोत्सव के आयोजन के लिए भोपाल को ही क्यों चुना? 

देखिए भोपाल काफी प्रसिद्ध होता जा रहा है। किसी भी तरह की शूटिंग या फिल्म से संबंधित कोई कार्य होता है, तो भोपाल एक नैसर्गिक पसंद बनता जा रहा है। संभवत: इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हमारी केंद्रीय टीम ने भोपाल का चयन किया होगा।

चित्र भारती का ये फिल्मोत्सव बाकी फिल्मोत्सव से कैसे अलग है?

यह एक राष्ट्रीय लघु फिल्म उत्सव है इसलिए यह बाकी की फिल्मों से काफी अलग है। इसका मुख्य आधार यह है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए भी 5 से 30 मिनट का शॉर्ट फिल्म बनाया जा सके। हमारा प्रयास युवाओं को फिल्मों से जोड़ने का है। फिल्मों में वह शक्ति है कि वह लोगों के विचार को प्रभावित करता है। भारतीय विचार जो हजारों वर्ष पुराना है उसे कैसे फिल्मों में लाया जाए। हमारा प्रयास है कि भारतीय सिनेमा में भारतीयता का दर्शन हो।

जिन युवाओं के पास प्रोफेशनल कैमरे नहीं है लेकिन वह मोबाइल से फिल्म बनाना चाहते हैं, ऐसे युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए किस तरह का प्रयास किया जा रहा है? 

इसमें कैंपस का भी श्रेणी है। भारत के किसी भी कैंपस या उसके बाहर के लोग भी यदि मोबाइल से शार्ट फिल्म बनाना चाहे तो वह भी बना सकते हैं। क्योंकि मूल उद्देश्य यह है कि लोगों को जोड़ा जाए। इस कैटेगरी में यह बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता कि आप कैमरा इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं। हम आप के प्रयास को परखते हैं। इस श्रेणी को इस लिए विशेष रूप से बनाया गया है कि मोबाइल का इस्तेमाल किया जा सके।

12 जनवरी को ट्रॉफी का अनावरण हुआ था उसके बारे में कुछ बताइए।

ट्राफी का अनावरण इसलिए भी जरूरी था कि एक महीने बाद ही लघु फिल्म उत्सव का आयोजन होगा, तो एक चेतना लोगों में जाए, इसलिए यह आयोजित किया गया था। इसमें मनोज मुंतशिर मुख्य वक्ता थे। लोगों उन्हें काफी पसंद करते हैं, उन्हें सुनना चाहते हैं। इसलिए उन्हें बुलाया गया था और यह कार्यक्रम काफी सफल भी रहा था।

लघु फिल्म उत्सव के लिए अब तक कितने वीडियो प्राप्त हुए?

हमारे पास लगभग 750 से वीडियो आ चुके हैं। हमारी स्क्रीनिंग कमेटी लगातार उसकी समीक्षा कर रही है। भारत के लगभग सभी राज्यों से लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। युवाओं ने काफी रुचि दिखाई है और 15 दिसंबर भाग लेने का अंतिम दिन था, यदि हमने तारीख थोड़ी सी और बढ़ा दी होती तो शायद ये आंकड़ा दोगुना भी होता। लेकिन हमने ये निर्णय लिया था कि 15 दिसंबर के बाद एंट्री बंद कर दिए जाएंगे।

लोगों में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता होती है कि वह जान पाए, इस लघु फिल्म उत्सव में कौन से वो बड़े हस्ती हैं जो शामिल हो रहे हैं। क्या आप उनके नाम पर प्रकाश डालेंगे?

यदि आप पुराने आयोजनों पर ध्यान देंगे तो पाएंगे कि हेमा मालिनी जी, सुभाष घई जी, अब्बास मस्तान, प्रसून जोशी जी मधुर भंडारकर आ चुके हैं। इस बार हमारा प्रयास है कि माधुरी दीक्षित जी रवीना टंडन जी अक्षय कुमार जी और वो सभी बड़े नाम जो आप सोच पाएंगे उन्हें बुलाया जाए। समस्या केवल dates का है।  लेकिन हम प्रयास कर रहे हैं।

चूंकि कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे रही है, और अगले महीने से फिल्मोत्सव का आयोजन होगा। ऐसे में  कोरोना का बचाव करते हुए सफल आयोजन हो इसके लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं?

यह बहुत बड़ी चुनौती है और हम सभी यह प्रयास कर रहे हैं कि, लोगों को सुरक्षित रखते हुए सफल आयोजन किया जाए। हम लोगों की बैठक प्रारंभ हो चुकी है। यदि बहुत ज्यादा लोगों को बुला लिया जाए तो खतरा हो सकता है। इसलिए हम इस पर बहुत जागरूक होकर बैठक कर रहे हैं।

आप भारत के भीतर आने वाले दिनों में शॉर्ट फिल्म के भविष्य को कैसे देखते हैं? 

Short हो या long मायने यह रखता है कि, story telling कैसी है। मेरा मानना है कि हर एक फिल्म कहानी है। हर मनुष्य का रुझान फिल्मों में होता है। हमें बचपन से दादी-नानी की कहानियां पसंद होती है। हम पुस्तकों में पढ़े या documents और webseries देखें, ये सभी कहानियां है। कहानियों का स्वरूप और माध्यम बदलता रहेगा, लेकिन कहानियां चलती रहेगी।

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