भारत की सबसे ‘यंग डिटेक्टिव’ कंपनी शुरू कर लड़कियों को दे रही ट्रैनिंग।

हम लड़कियों के लिए करियर के तय पैमाने सेट कर दिए जाते है, जिसके अंदर हम खुद को फिट करना ही होता है तभी ‘हमे गुड गर्ल’ माना जाता है। पर जो इन पैमानों में फिट नहीं हो पाता या जिनके सपने मेनस्ट्रीम से अलग हो वो समाज के लिए विलन बन जाते है। ठीक ऐसा ही आकृति खत्री  के साथ भी हुआ, उन्हे आसान रस्तों पर नही चलना था। कुछ ऐसा करना था, जहा नया कर पाएं और दूसरो के लिए नए रास्ते बना पाए। जब उन्होंने जासूसी की फील्ड को बतौर करियर चुना तो परिवार और समाज के लिए वह असहनीय फैसला था। लेकिन उन्होंने अपने ज़िद और सपनो के आगे किसी की नही सुनी, अपनी बात मनवाई और अपने पैशन को फॉलो किया।

2007 में आकृति ने नौकरी की शुरुआत की तब वो केवल 20 साल की थी। कई सालो तक नौकरी करने के बाद 2012 में  ‘वीनस डिटेक्टिव प्रा. लि.’ नाम से अपनी कंपनी शुरू की। शुरुआत की तो कई लोगो ने उन्हें कहा कि तुम लड़की हो इस मेल-डॉमिनेटेड फील्ड में बिना किसी के सहारे टीक नही पाओगी लेकिन उन्होंने सभी को गलत प्रूव करते हुए बिना पिता या पति के सहारे अपनी कंपनी शुरू की ओर अपनी पैशन से एक डिटेक्टिव एजेंसी को कॉरपोरेट कंपनी में तब्दील कर दिया जहा लड़कियों को जासूस बनने की ट्रेनिंग दी जाती है। आकृति का कहना है कि वो भविष्य की ‘नैंसी ड्रेयू’ तैयार कर रही है।